जोधपुर सहित प्रदेश में 17 जिलों के वन क्षेत्रों का तेज़ी से कम होने से हवा मे CO2 की मात्रा बढ़ रही हें||

Posted on 29/04/2016

प्रदेश में केवल 9.5 फीसदी भूमि पर ही जंगल है और यह भी धीरे धीरे कम हो रहा है। जोधपुर सहित प्रदेश के 17 जिलों में वनों का तेजी से क्षय हुआ है। सघन वन खत्म होने से मिट्टी और पौधों का कार्बन, कार्बन डाई ऑक्साइड के रूप में हवा में पहुंच गया है।

इस अतिरिक्त कार्बन से तापमान बढऩे के चलते ग्लोबल वार्मिंग बढ़ रही है। यह खुलासा शुष्क वन अनुसंधान संस्थान (आफरी) की ओर से राजस्थान के जंगलों में कार्बन स्थिरिकरण पर तीन साल के शोध में सामने आया है।

आफरी के अनुसार अजमेर, बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, जालोर, झुंझुनूं, जोधपुर, नागौर, पाली, बारां, भीलवाड़ा, झालावाड़, करौली, प्रतापगढ़, राजसमंद, सवाईमाधोपुर और टोंक जिलों के वन क्षेत्र की मिट्टी में खारापन बढ़ रहा है। लवणीय मिट्टी होने से वृक्ष, झाडि़यां और अन्य प्रकार की वनस्पति खत्म होती जा रही है।

वनस्पति के क्षरण के साथ मिट्टी का कार्बन, अकार्बनिक रूप यानी कैल्शियम व मैग्निशियम कार्बोनेट्स के रूप में संचित हो रहा है जो लाभदायक नहीं होता। इसके उलट अलवर, भरतपुर, धौलपुर और सिरोही के बायोमास में कार्बन अधिक है जिससे वहां वातावरण की स्थिति बेहतर है।

कार्बनिक रूप में ही उपयोगी है कार्बन

आफरी के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. जी सिंह ने बताया कि राजस्थान के जंगल में 305 मिलियन टन कार्बन स्टॉक है। इसमें से 142.6 मिलियन टन अकार्बनिक रूप में और 121.6 मिलिटन टन कार्बनिक रूप में है।

कार्बनिक रूप में कार्बन ह्यूमिक एसिड और फ्यूमिक एसिड के रूप में रहता है जो मिट्टी का पीएच 6 से 8 के मध्य रखता है। यही मिट्टी पौधों की वृद्धि के लिए आवश्यक होती है।

जैसे जैसे पौधा वृक्ष बनता जाता है, वातावरण की कार्बन डाई ऑक्साइड को सोखकर कार्बन के रूप में संचित कर अपना बायोमास बनाता है। स्पष्ट है कि घने जंगल अधिक होने पर वातावरण में कार्बन डाई ऑक्साइड कम होगी और तापमान नियंत्रित में रहेगा।

एक चौथाई कार्बन चाहिए जीवित बायोमास में

डॉ. सिंह ने बताया कि प्रदेश में 305 मिलियन टन कार्बन स्टॉक में से केवल 12.8 फीसदी कार्बन स्टॉक ही जीवित बायोमॉस यानी वृक्षों और झाडि़यों में मौजूद है जबकि अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार यह कुल कार्बन का 25 फीसदी होना चाहिए जिससे ग्लोबल वार्मिंग पर काबू पाया जा सके।

मिट्टी में ज्यादा कार्बन के यह है फायदे

– हवा में कार्बन की मात्रा कम रहेगी।

– वातावरण का तापमान कम रहेगा।

– मिट्टी की उवर्रता बढऩे से वनस्पति बढ़ेगी।

– अधिक वनीकरण से जैव विविधता बढ़ेगी।

– ग्लोबल वार्मिंग व जलवायु परिवर्तन पर काबू पाया जा सकेगा।

Source :- http://rajasthanpatrika.patrika.com

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