मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन योजना सवालों के घेरे में|||

Posted on 10/04/2016

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प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन योजना भी सवालों के घेरे में आ गई है। सरकार ने जिस तरह से योजना को लेकर हवा बनाई, वो हवा अब फुस्स होती दिख रही है। क्योंकि योजना के तहत किए जा रहे जल संबंधी विकास कार्य पहले से ही दूसरी योजनाओं के नाम से चल रहे थे।

इस सरकार ने केवल उन योजनाओं का इसमें विलय किया है। इसलिए बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि आखिर सरकार ने मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन योजना में नया क्या किया? और यदि योजना में कुछ भी नया विकास या बजट प्रस्तावित नहीं किया है तो इस योजना के प्रचार-प्रसार के लिए लाखों-करोड़ों क्यों फूंकें जा रहे हैं।

ज्ञात है कि प्रदेश भर में मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन योजना को लेकर जमकर वाहवाही लूटी जा रही है। अकेले जोधपुर जिले में योजना के तहत स्वीकृत कार्य तो अन्य विभागों की योजनाओं के हैं। जो हर साल नियमित बजट से होते रहे हैं।

विभाग योजनाओं के लिए बजट तो पूर्व में ही निर्धारित हो चुका है। मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन योजना को लाया गया तो अन्य योजनाओं का बजट ही इसमें शामिल कर लिया गया।

जोधपुर जिले में कुल 466 ग्राम पंचायतों में जल स्वावलम्बन योजना के तहत 63 गांवों में अभी विभिन्न विभागों के करीब 4 हजार 248 काम 80 करोड़ राशि के कार्य चल रहे हैं। इसमें एनीकट, चेकडेम, जलकुंड व टांके बनाने के कार्य शामिल हैं। जिसके लिए जल स्वावलंबन से नहीं बल्कि उन विभागों के नियमित बजट में से ही रुपए खर्च किए जा रहे हैं।

योजना के तहत जोधपुर जिले के लिए सरकार ने अलग से 63 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं लेकिन इस राशि में से अभी तक 17 करोड़ की राशि ही दी गई है। इससे यह साबित हो रहा है कि सरकार विभिन्न विभागों के जल से संबंधित नियमित कार्यों को ही जल स्वावलंबन योजना में शामिल करके वाहवाही बटोर रही है।

योजना में शामिल अन्य विभागों के कार्य

विभाग                                                    काम राशि

महात्मा गांधी नरेगा                         242 10.17 लाख रुपए।

आईडब्ल्यूएमपी                             2004 39.1 लाख रुपए।

एग्रीकल्चर                                     831 50.19 लाख रुपए।

वन विभाग                                         05 84.2 लाख रुपए।

पंचायतीराज                                388 949.88 लाख रुपए।

इरीगेशन                                          16 367.3 लाख रुपए।

पीएचईडी                                              24 96 लाख रुपए।

 

राजस्थान, 342 लाख हेक्टेयर भौगोलिक क्षेत्र के साथ देश का सबसे बड़ा राज्य है जिसमें से 101 लाख हेक्टेयर बंजर भूमि है।

अरावली रेंज दक्षिण पश्चिम से उत्तर-पूर्व तक फैली हुई है और अगर दो भागो मे राज्य को देखा जाए तो राज्य के पश्चिमी ओर थार रेगिस्तान है, जो राज्य का लगभग 60% क्षेत्र है|

दुर्भाग्य से राजस्थान देश में सबसे शुष्क राज्य मे आता हे| 1991 के बाद पानी की कमी देखी गई हे, जिसमे प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता 1000m3/year हे|

जनसंख्या की उच्च विकास दर के साथ प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता भविष्य में चिंता का विषय हो सकता हे|

ओर पानी संबंधी समस्याओ को लेकर लगभग रोजाना वेस्टर्न राजस्थान के हर जिले मे न्यूज़ यही होती हे||

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