अपना अधिकार जाने | सूचना का अधिकार पहचाने ||

Posted on 17/02/2016

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आरटीआई का अर्थ है

भारत  सरकार ने सदैव अपने नागरिको के जीवन को सहज, सुचारु बनाने पर बल दिया है और इस प्रकार इसे ध्‍यान में रखते हुए भारत को पूरी तरह लोक तांत्रिक बनाने के लिए आरटीआई अधिनियम स्थापित किया गया है।

आरटीआई का अर्थ है सूचना का अधिकार और इसे संविधान की धारा 19 (1) के तहत एक मूलभूत अधिकार का दर्जा दिया गया है। धारा 19 (1), जिसके तहत प्रत्येक नागरिक को बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दी गई है और उसे यह जानने का अधिकार है कि सरकार कैसे कार्य करती है, इसकी क्या भूमिका है, इसके क्या कार्य हैं आदि।

प्रत्येक नागरिक कर का भुगतान करता है अत: इसे अधिकार मिलते हैं और साथ ही उसे यह जानने का पूरा अधिकार है कि उसके द्वारा कर के रूप में दी गई राशि का उपयोग कैसे किया जा रहा है। सूचना का अधिकार अधिनियम प्रत्येक नागरिक को सरकार से प्रश्‍न पूछने का अधिकार देता है और इसमें टिप्‍पणियां, सारांश अथवा दस्‍तावेजों या अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियों या सामग्री के प्रमाणित नमूनों की मांग की जा सकती है।

आरटीआई अधिनियम पूरे भारत में लागू है (जम्‍मू और कश्‍मीर राज्य के अलावा) जिसमें सरकार की अधिसूचना के तहत आने वाले सभी निकाय शामिल हैं जिसमें ऐसे गैर सरकारी संगठन भी शामिल है जिनका स्वामित्व, नियंत्रण अथवा आंशिक निधिकरण सरकार द्वारा किया गया है।

आरटीआई आवेदन का प्रारूप क्या हो

केंद्र सरकार के विभागों के लिए कोई निर्धारित प्रारूप नहीं है. आप एक सादे कागज़ पर एक सामान्य अर्ज़ी की तरह ही आवेदन बना सकते हैं और इसे पीआईओ के पास स्वयं या डाक द्वारा जमा कर सकते हैं. (अपने आवेदन की एक प्रति अपने पास निजी संदर्भ के लिए अवश्य रखें) सूचना प्राप्ति की समय सीमा पीआईओ को आवेदन देने के 30 दिनों के भीतर सूचना मिल जानी चाहिए. यदि आवेदन सहायक पीआईओ को दिया गया है तो सूचना 35 दिनों के भीतर मिल जानी चाहिए.

आरटीआई कार्यकर्ता है ?

आरटीआई कार्यकर्ता , जो आम जनता के लिए जानकारी उपलब्ध बनाने के लिए काम करता है। वे लोग जो जानकारी साझा करने के लिए और अधिक व्यापक रूप जुनून और उत्सुक द्वारा संचालित कर रहे हैं। वे लोग हैं, जो सरकार के अंदर एक बड़े पैमाने पर परिवर्तन और सुधार के लिए RTI की  जरूरत महसूस करते हैं।

 सूचना का अधिकार अधिनियम के उद्देश्य

सूचना के अधिकार कानून के बुनियादी वस्तु , नागरिकों को सशक्त बनाने के लिए सरकार के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने , भ्रष्टाचार को कम करने, और वास्तविक अर्थों में लोगों के लिए हमारे लोकतंत्र केसे काम कर रहा है, यह बताना हे| नागरिको को सरकार की गतिविधियो के बारे मे अवगत करने की दिशा मे बड़ा कदम हे|

सूचना के अधिकार के अर्न्तगत कौन से अधिकार आते हैं?

सूचना का अधिकार 2005 प्रत्येक नागरिक को शक्ति प्रदान करता है कि वो:
सरकार से कुछ भी पूछे या कोई भी सूचना मांगे.
किसी भी सरकारी निर्णय की प्रति ले.
किसी भी सरकारी दस्तावेज का निरीक्षण करे.
किसी भी सरकारी कार्य का निरीक्षण करे.
किसी भी सरकारी कार्य के पदार्थों के नमूने ले.

भारत में आरटीआई कार्यकर्ताओं पर हमले

बीते सालों के रुझान इस बात का संकेत करते हैं कि भ्रष्टाचार में लिप्त तबके  आरटीआई कार्यकर्ताओं की हिम्मत को पस्त करने के लिए उनके ऊपर बड़ी तादाद में हमले कर रहे हैं। कुछ राज्यों में सूचना का अधिकार अधिनियम का इस्तेमाल करने क्रम में जान गंवाने वाले लोगों की संख्या बहुत अधिक है। मिसाल के लिए बीते सालों में महाराष्ट्र में आरटीआई कार्यकर्ताओं पर 52 दफे हमले हुए हैं और इनमें आठ मामलों में सूचनार्थियों की हत्या हुई है। आरटीआई कार्यकर्ताओं पर हुए हमलों के मामले में गुजरात दूसरे नंबर पर है। वहां 34 मामलों में आरटीआई कार्यकर्ताओं पर हमले हुए हैं और इसमें तीन मामलों में सूचनार्थियों की हत्या की सूचना है।।

सीएचआरआई के दस्तावेज का संकेत है कि जल, जंगल और जमीन से संबंधित सूचनाओं को उजागर करने का मामला हो तो आरटीआई कार्यकर्ताओं की हत्या या उनके उत्पीड़न की आशंका सबसे ज्यादा है।( आरटीआई कार्यकर्ताओं की हत्या या उन पर हुए हमलों के प्रमुख कारणों को नीचे बिन्दुवार में बताया गया है)

हत्या /हमला/उत्पीड़न के कुल मामले
(तथाकथित)                                                 250

हत्या                                                            31+

आत्महत्या                                                   2

हमला या उत्पीड़न                                        214+

गैंगस्टर और आपराधिक आचरण वाले लोगों
द्वारा आरटीआई कार्यकर्ताओं पर हमला          4 (2 cases)

सर्वाधिक कम उम्र में हमले का शिकार           18 years

महिला                                                        18 + (19)

विकलांग                                                       1

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लिया    6 cases

  • मुजफ्फरपुर ज़िला के रत्नौली पंचायत के सामाजिक कार्यकर्ता और पेशे से वकील रहे रामकुमार ठाकुर आरटीआई के माध्यम से मनरेगा में घपले की सच्चाई सतह पर लाना चाहते थे. मार्च, 2013 में उनकी हत्या कर दी गई.

तीन साल में छह कार्यकर्ताओं की हत्या

सूचना मांगने की वजह से साल 2010 से 2013 के बीच राज्य में छह लोगों की हत्या कर दी गई. इस मामले में बिहार और गुजरात का स्थान देश में दूसरा है. इस सूची में अव्वल महाराष्ट्र है, जहाँ नौ कार्यकर्ताओं की हत्या की जा चुकी है.

बिहार राज्य सूचना आयोग के मुताबिक मार्च, 2012 से फरवरी, 2014 तक यहाँ 392 आवेदकों को उत्पीड़न का शिकार होना पड़ा है.

झारखंड से कार्यकर्ता ललित मेहता की मौत हो गई 5/15/08 पर मेहता ने आरटीआई का इस्तेमाल किया नरेगा से संबंधित घोटालों का पर्दाफाश करने के लिए। नरेगा के सामाजिक अंकेक्षण के लिए लड़ाई लड़ी

गुजरात से अमित जेठवा कार्यकर्ता 2010/07/20 पर ही मौत हो गई थी। गिर वन क्षेत्र में अवैध खनन का पर्दाफाश करने के लिए आरटीआई का इस्तेमाल किया।

मुंबई से कार्यकर्ता प्रेमनाथ झा, विरार पर 25 फ़रवरी 2012 वसई विरार नगर ​​निगम कई निर्माण परियोजनाओं के विवरण की मांग के साथ कई आरटीआई दायर की मौत हो गई ।

 राजस्थान में आरटीआई कार्यकर्ताओं पर हमले

शंभू राम उम्र 30 जो की राजस्थान के फलोदी मे जैसल गाँव जिला जोधपुर के निवासी हे. शंभू राम ने सजल योजना का नलकूप स्थापना ओर मनरेगा के 50 लाख के भ्रष्टाचार मे लिप्त सरपंच का खुलासा किया था। उन्ही दिनो गाँव मे लगे आधार कार्ड बनवाने के कॅंप से जब बाहर निकले तो सरपंच ओर उनके कुछ साथियो ने शंभू पर लोहे की छड़ और लाठी के साथ निर्दयता से उसे हमला कर दिया|

3 मार्च, 2011 पर एक दलित कार्यकर्ता Mangalaram – बाड़मेर जिले में Bamanor के एक निवासी को बेरहमी से गांव के सरपंच गुलाम शाह और उनके गुंडों ने कथित तौर पर कुल्हाड़ियों से हमला किया गया था । ” वह एक आरटीआई आवेदन के माध्यम से सभी सार्वजनिक 2011 के बाद से शाह की पंचायत द्वारा किए गए श्रमिकों के बारे में जानकारी की मांग दायर करने की हिम्मत की थी

इसी तरह, गोवर्धन सिंह की कहानी , बीकानेर के एक आरटीआई कार्यकर्ता अलग नहीं है। 34 वर्षीय कार्यकर्ता बीकानेर के अपने पैतृक जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक अभियान चलाने के लिए एक भारी कीमत चुकानी पड़ी थी। गोवर्धन सिंह ने 100 आर टी आइ लगाकर बेंको, सरकारी विभागो ओर पुलिस कर्मियों की संपत्ति के बारे में सवाल पूछा गोवर्धन के लिए असहज हो गया| रातों रात 9 FIR उसके खिलाफ दर्ज की गई| पुलिस ने उसके घर पर छापा मारा , उसकी कार को जब्त कर लिया और उनके कार्यालय बंद कर दिया। गोवर्धन के परिवार के सदस्यों का कहना है कि वे लगातार परेशान किया जा रहा है।

RTI Rules of Rajasthan

http://yashada.org/2012/pdfs/rti_annexure/annexure1/state_government/rajasthan_rti_rules_2005.pdf

RTI कार्यकर्ताओ की सुरक्षा के लिए आरटीआई आवेदन के उत्पीड़न और रणनीतियों का विश्लेषण

http://rti.gov.in/manu_moudgil_rti_fellowship_report.pdf

RTI का आवेदन करे, देश को भ्रष्टाचार से मुक्त करे||

सूचना का अधिकार | देश की जनता के हित मे है कारगर ||

2 Comments

  • Profile photo of Pritam Joshi

    Pritam Joshi

    17/02/2016

    Takshendra its good job…

    but i come to know one of the adverse news about RTI activists that they also blackmail to some of the fair price shop owner and take handsome amount from them for not disclosing the information…

  • Profile photo of takshendra sharma

    takshendra sharma

    20/02/2016

    If you know any case related to your comment then why you don’t disclose this.

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