फलोदी को ज़िले का दर्जा

Posted on 30/12/2016

सन 1460 में राव जोधा जी ने अपने पुत्र राव सूजा को फलोदी का शासक बना के भेजा | सन 1469 में सिद्धजी(Sidhuji) की सहायता से दुर्ग की नींव रखी गयी | इस कार्य में “फला” नामक महिला ने धन उपलब्ब्ध कराया इसी के नाम से आज फलोदी नाम पड़ा है |

फलोदी शहर अपने धार्मिक महत्वता के लिए प्रसिद्ध है यहाँ स्थित भगवान कल्याणजी ,लटियालजी ,शांतिनाथ जी एवम पार्श्वनाथ के मंदिर अति  प्राचीन है | कल्याणजी का मंदिर सन 1236 में निर्मित हुआ था  |

फलोदी शरह नमक उत्पादन व व्यवसाय का एक प्रमुख केंद्र है | शहर के आसपास नमक की मात्रा ज्यादा होने से यहाँ की आर्थिक गतिविदियों में विस्तार हुआ और स्थानीय रोजगार के अवसर उपलब्ध हुए |

नगर के विकास एवम विस्तार के साथ साथ यहाँ नगरीय समस्याए भी बढ़ने लगी है जिसमें पानी की नकासी, यातायात अवरुद्ध संकरे मार्ग प्रमुख है |

शहर के बाहरी  क्षेत्रो में अव्यवस्था एवम अनियोजित बस्तिया विकसित हो जाने से यहाँ मुलभुत सुविधायो का अभाव होता जा रहा है

इसी कारण फलोदी को सुनियोजित विकास के लिए ज़िला बनाने की जरुरत है |
 

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