बाड़मेर थार महोत्सव में सरकार नहीं दे रही सहयोग : पर्यटन को होगा नुक्सान

Posted on 06/02/2016

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1987 में शुरू हुआ थार महोत्सव ज़िले की पर्यटन , कला और संस्कृति को बढ़ावा देने का परिचायक बन गया था गुजरात में रण उत्सव , जैसलमेर के मरू महोतसव की तरह देश-विदेश में पहचान बनी और अब पर्यटन को आकर्षित केर रहा है  थार महोत्सव १९८७ के बाद लगातार चलता रहा और बाड़मेर , महाबार किराडू , बालोतरा में कार्यकर्म किये गए थे .पर्यटन विभाग की ओर से २ लाख रुपये इस आयोजन के लिए मिल रहे थे . 2012

Thar Mahotsav

के बाद थार महोत्सव का आयोजन नहीं हो रहा . जिस तरह रण महोत्सव को निश्चित समय आयोजन किया जाता है वैसे ही अगर इस महोत्सव को भी किया जाये तो पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकता है साथ ऐसे महोत्सव राजस्थान की कला अ संस्कृति ओर लोक कलाकारों को नया मंच देने के लिए बहुत उपयोगी है बाड़मेर में जैसलमेर की तरह ही शिल्प इको टूरिज्म पेट्रो ओर बॉर्डर टूरिज्म की अपार सम्भावनाये है . बाड़मेर में  देश  के विभिन्न स्थानो के लोग यहा काम करते है जिससे उनको यहा की संस्कृति से रूबरू करने में थार महोत्सव का बड़ा योगदान  है तेल व् पेट्रोलियम के चलते यहा विदेशी भी मौजूद है . सेना वायु सेना एवं बीएसफ में देशभर के विभिन्न प्रांतो के लोग भी यहा रहने लगे है

 

 

 

 

 

 

Source : Patrika

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