पश्चिमी राजस्‍थान में मिले पोटाश के नए भंडार

Posted on 02/02/2016

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जियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया के सर्वे में श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर और चूरू की धरती में 2476 मिलियन टन पोटाश होने की पुष्टि हुई है। यह पोटाश कहीं 500 मीटर तो कहीं 750 मीटर की गहराई पर है। सामने आया है। यह रिपोर्ट आने के बाद राज्य सरकार ने यहां पोटाश की माइनिंग के लिए ब्लाक बनाने का काम शुरू कर दिया है। यहां अब निजी कंपनियां आकर पोटाश निकालेंगी। उल्‍लेखनीय है कि देशभर में अभी कहीं भी पोटाश नहीं मिला है। हर साल लाखों टन पोटाश कनाडा सहित दूसरे देशों से आयात करना पड़ता है।
यहां मिले पोटाश के भंडार…

बीकानेर, लखासर, गुसाईंसर, हंसेरा, कालू, जैतपुरा, सूरतगढ़, हनुमानगढ़, सतीपुरा श्रीगंगानगर में पोटाश के भंडार ज्यादा होने की उम्मीद है। यहां 400-500 मीटर पर पोटाश आना शुरू हुआ और 750 मीटर तक पोटाश मिलता रहा।

70 बोर बनाकर हुई जांच…

जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर चूरू में पोटाश का पता करने के लिए 1972 से 1993 तक खोज के दौरान 70 बोर बनाए थे। खोज के इस काम को नागौर-श्रीगंगानगर बेसिन नाम दिया गया। यह काम कई और जिलों में भी हुआ, लेकिन पोटाश यहीं मिला। अब दुबारा सर्वे हुआ तो 2476 मिलियन टन भंडार होने की पुष्टि हुई।
कनाडा पर खत्‍म होगी निर्भरता…

खनन विभाग के अधिकारियों की मानें तो खाद बनाने में पोटाश का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है। पूरे विश्व में जितना पोटाश है, उसकी दस फीसदी खपत केवल भारत में है। भारत सबसे ज्यादा पोटाश कनाडा दूसरे देशों से आयात करता है। बीते साल की बात करें तो देश में 322 डालर प्रति टन की दर से पोटाश का आयात किया गया था। खपत की बात करें तो 2012-13 में 30 लाख टन हो गई थी। ऐसे में पोटाश की खुदाई होती है तो देश के नक्शे पर बीकानेर संभाग का नाम सबसे ऊपर होगा।

अभी ब्लाक बनाने की हो रही तैयारी …
अभी खनन विभाग चारों जिलों में अलग-अलग ब्लाक बना रहा है। फिर यह ब्लाक अलग-अलग कंपनियों को नीलाम करके बेचे जाएंगे। खुद सीएम वसुंधरा राजे इस प्रोजेक्ट में रुचि  ले रही हैं। बताया जा रहा है कि दिसंबर 2015 में जयपुर में रिसर्जेंट राजस्थान 2015 होगा। उसी सम्मेलन में माइनिंग के लिए कंपनियों का चयन होगा। इससे सरकार के खजाने में भी करोड़ों-अरबों आएंगे।

उत्‍पादक जिले होंगे मालामाल

श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़, बीकानेर चूरू में सरकार अभी पोटाश की अधिकता वाले जिलों में ब्लाक बना रही है। यह ब्लाक कंपनियों को बेचे जाएंगे। कंपनी श्रीगंगानगर से चूरू आकर वहां जमीन की खुदाई

करके पोटाश निकालेंगी। इसके लिए मशीनरी तो आएगी ही, ट्रैंड स्टाफ इंजीनियर्स भी आएंगे। पोटाश मिलने के बाद यहां खाद फैक्ट्री लगेंगी। फैक्ट्री लगाने के लिए करोड़ों रुपए निवेश होंगे। इसके…

लिए जमीन की भी जरूरत होगी। खाद अन्य कारखाने खुलने के बाद संभाग के युवाओं को रोजगार मिलेगा। बाहर के एक्सपर्ट आकर उन्हें ट्रेंड करेंगे तो युवाओं में और ज्यादा निखार आएगा। चूंकि खाद की सबसे ज्यादा खपत भी इन्हीं जिलों में है। इसलिए भविष्य में खाद का संकट भी नहीं होगा। किसानों को आसानी से खाद मिलने लगेगी
Source: Money Bhasker

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