जालोर की ग्रेनाइट इंडस्ट्री से मिल सकता है लाखो लोगो को रोजग़ार

Posted on 28/01/2016

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राजस्थान के ग्रेनाइट का  ७००० करोड़ का इंडस्ट्री विश्व में भारत की २० % की भागीदारी रखता है जालोर , राजस्थान के ग्रेनाइट राजधानी कहा जाता है यह अपने उच्च गुणवत्ता ग्रेनाइट के लिए प्रसिद्ध है । ग्रेनाइट स्लैब और टाइल का निर्यात ताइवान ,चीन,संयुक्त अरब अमीरात,अमेरीका,कनाडा,ब्रिटेन,जापान ,आदि कर रहे है

RIICO  ने जालोर में 4 औद्योगिक क्षेत्रों का विकास किया गया है जिसमें जालोर ,बिशनगढ़ सांचोर और भीनमाल  प्रमुख है और चौथा चरण बागरा में प्रस्तावित किया गया है , सरकार की ओर से फेज चार की  स्थापना की कवायद सालो से कागजो में ही दफ़न है।

ग्रेनाइट से सरकार को करोड़ो को फायदा होता है  जिसमें २० करोड़ से ज़यादा माइनिंग रॉयलिटी और ३० करोड़ से ज़यादा  सेलटैक्स एवं १०  करोड़ प्रोडक्शन एंड ट्रांसपोर्ट टैक्स से मिलता है  २००० करोड़ की ग्रेनाइट इंडस्ट्री कम से कम बीस हज़ार परिवारों को रोजग़ार के अवसर प्रदान कर सकती है ग्रेनाइट इंडस्ट्री पर सरकार की योजनाओ के कारण  उद्योग की कमर टूट गयी है जालोर का ग्रेनाइट उद्योग की  शुरुआत ४५ साल पहले आरसएमडीई के दवारा  तीन लीज के साथ शुरू की . इसके बाद  वर्ष ८०-८१ में सरकार ने इसका व्यावसयिककरण किया . रीको की स्थापना के साथ फस वन में १०० भू खण्डो का आवंटन किया और पहली निजी लीज वर्ष ८२-८३ मैंने मोकलसर में दी . वर्ष ९२-९३ तक दो फेज ओर विकसित किये ओर ४५० उद्द्योग की स्थापना तक हो गयी . वर्तमान में करीब १००० यूनिट संचालित है . सरकार का विकेन्द्रीकरण ना होने के कारण रीको में रिक्त पदो की भरपाई नहीं हो पा रही ओर इंफ्रास्टर्क्चरे के बुरे हाल है  

 

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