गहलोत -वसुंधरा की सियासत का मोहरा न बने राजस्थान की जनता

Posted on 08/09/2018

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राजस्थान में भाजपा कांग्रेस का बारी बारी से विधान सभा में आना एक आम बात है | कभी भाजपा अपनी गौरव यात्रा निकलती है या कभी कांग्रेस अपनी संकल्प यात्रा | राजस्थान की जनता ने दोनों को बारी बारी से चुन कर भी देख लिए | बड़े बड़े राजनेताओ के सियासी खेल में जनता अपने राजस्थान को भूल गयी | ये भी याद नहीं रहा की कब उनके बच्चो को रोजी रोटी के लिए राजस्थान से बहार जाना पड़ा | ये भी भूल गयी की केवल सरकारी परीक्षाओ के फॉर्म भरते-भरते उनके बच्चे अब बच्चे नहीं रहे बल्कि खुद के बच्चो के अभिवावक हो गए | खेतो की ज़मीन कब सरकारों द्वारा बंजर हो गयी किसी को पता नहीं चला | कोई जाट कोई राजपूत कोई अगड़ा कोई पिछड़ा बन कर राजस्थान को बीमारू प्रदेश बनाने में लग गया | आज आलम ये है की हर आदमी राजनेताओ की व्यक्ति गत अभिलाषाओं को पूरा करने के लिए दौड़ता नज़र आ रहा है | यही आलम रहा तो खुद अपनों को देखने को तरस जायेगा राजस्थान |
थोड़ा रुको और सोचो क्या राजनेताओ को जिताने पर राजस्थान का कुछ विकास हुआ | अगर जवाब नहीं है तो आगे पढ़िए | क्या कांग्रेस की तरह राजस्थान में इंजीनियरिंग या बीएड कॉलेज खोलने से ही विकास होगा | क्या आंध्र की तरह यहां की सरकार की ये जिम्मेदारी नहीं की सॉफ्टवेयर हार्डवेयर की कंपनी भी खोले |
क्या भाजपा की तरह रिसर्जेंट राजस्थान कहने से राजस्थान में निवेश आएगा | एक दूसरे पर सिर्फ आरोप लग रहे है और बेचारा राजस्थानी अपनी भाषा , संस्कृति और परिवार की लिए संघर्ष कर रहा है
हमे अपने आप से पूछना होगा की कब तक हम लोग मोहरे बनते रहेंगे और हमारे घर के चिराग किसी ओर राज्य को रोशन करेंगे |

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